Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

सत्संगति बुद्धि की जड़ता को हटाती है, वाणी में सत्य का संचार करती है, सम्मान की वृद्धि करती है, पापों को दूर करती है, चित्त को प्रसन्न करती है और दसों दिशाओं में कीर्ति फैलाती है, बताओ सत्संगति मनुष्य के लिए क्या नहीं करती है? सज्जनों का संग स्वर्ग में वास के समान है।

Holy company removes the dullness of the intellect, infuses truth into speech, increases respect, dispels sins, gladdens the mind and spreads fame in all ten directions—tell me, what does holy company not do for a person? The company of the good is like dwelling in heaven.

— आराध्य सूत्र · #5755

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति