Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

कुछ व्यक्तियों से भेंट अच्छी होती है किन्तु सहवास अच्छा नहीं होता, कुछ का सहवास अच्छा रहता है, भेंट नहीं, कुछ से भेंट भी अच्छी होती है और सहवास भी, कुछ का न सहवास अच्छा होता और न ही भेंट अच्छी होती है।

With some, meeting is pleasant but living together is not; with some, living together is pleasant but not meeting; with some, both meeting and living together are pleasant; and with some, neither is pleasant.

— आराध्य सूत्र · #5750

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति