Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

भिन्न-भिन्न देश में जाति, कुल में उत्पन्न जो मनुष्य जिनशासन के भक्त हैं वे विद्वानों के द्वारा परस्पर भाई माने गये हैं।

People born in different lands, castes and families who are devotees of the Jina's teaching are regarded by the wise as brothers to one another.

— आराध्य सूत्र · #5749

इसी विषय के और सूत्र

सभी संगति →
संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति