Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

कल्पवृक्ष संकल्पित वस्तु को देता है, प्रसिद्ध कामधेनु इच्छित वस्तु को ही पूर्ण करती है और चिन्तामणि चिन्तित वस्तु को ही देता है परन्तु सत्संगति समस्त वस्तुओं को देती है। ऐसी संगति करना जिससे वैभव बढ़े या ना बढ़े पर भव अवश्य घटे और वीतराग शासन पर श्रद्धा बढ़े।

The wish-tree gives what is resolved upon, the celebrated wish-cow fulfils only what is desired, and the wish-gem grants only what is thought of; but holy company gives all things. Keep such company that, whether or not your fortune grows, your cycle of births surely shrinks and your faith in the path of the passionless Ones increases.

— आराध्य सूत्र · #5731

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति