Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

दुष्ट की संगति कीर्ति नष्ट कर देती है, क्लेश उत्पन्न करती है, अशुभ गति प्रदान करती है, मनुष्यों में उद्वेग और खिन्नता उत्पन्न करती है, उपहास का पात्र बनाती है, बुद्धि को भ्रम में डाल देती है, प्रतिष्ठा का नाश कर देती है, प्राण शक्ति क्षीण कर देती है, इस प्रकार कुसंगति सकल मंगलों को नष्ट कर देती है।

The company of the wicked destroys fame, breeds strife, leads to evil destinies, brings agitation and dejection, makes one an object of ridicule, deludes the intellect, ruins reputation and drains vitality; thus bad company destroys all auspiciousness.

— आराध्य सूत्र · #5680

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति