Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

झूठे की संगति करोगे तो ठगे जाओगे, मूर्ख हित का इच्छुक होने पर भी अहितकर ही होगा, कृपण अपने स्वार्थ के लिए दूसरे को अवश्य हानि पहुँचाएगा, नीच आपत्ति के समय दूसरे का नाश करेगा अतः कुसंगति छोड़कर सुसंगति करना चाहिए।

Keep company with a liar and you will be cheated; a fool, though wishing your good, will only harm you; a miser will surely injure another for his own gain; and a base person will destroy others in times of trouble. So abandon bad company and seek good.

— आराध्य सूत्र · #5660

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति