Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

दुष्ट व्यक्ति का साथ किसी भी हालत में अच्छा नहीं होता है, दुष्ट व्यक्ति और साँप इन दोनों में साँप फिर भी अच्छा है क्योंकि साँप तो काल वश सिर्फ एक बार ही काटता है पर दुष्ट तो पग-पग पर हानि पहुँचाता है।

The company of a wicked person is never good; between a wicked man and a snake, the snake is still better, for the snake bites only once when death is due, while the wicked harms at every step.

— आराध्य सूत्र · #4832

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति