Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
वाणी

मुनियों के दोषों का चिन्तन करने वाला मनुष्य भाग्यहीन, विकलांग, मूर्ख, विवेक रहित, नपुंसक और नीच कार्य करने वाला नीच होता है।

One who dwells on the faults of monks becomes luckless, crippled, foolish, devoid of discernment, impotent, and a base doer of vile deeds.

— आराध्य सूत्र · #3524

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