Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
चरित्र

आचार से बढ़कर और कोई प्रचार हो ही नहीं सकता, जो काम मनुष्य दूसरे से कराना चाहता है, उसे वह स्वयं करे, उसका यह सबसे बढ़कर प्रचार होगा।

There can be no greater propagation than one's own conduct; whatever one wishes others to do, let him do it himself—that is the finest advocacy.

— आराध्य सूत्र · #3258

इसी विषय के और सूत्र

सभी चरित्र →