Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

मूर्ख व्यक्ति परस्पर बातचीत करने वाले दूसरे लोगों की भली बुरी बातें सुनकर उनसे बुरी बातों को ही ग्रहण करता है, ठीक वैसे ही जैसे सुअर अन्य अच्छी खाद्य वस्तुओं को छोड़कर विष्ठा को ही अपना भोजन बनाता है।

From all he hears, good and bad, the fool absorbs only the bad, just as a pig ignores good food and feeds on filth.

— आराध्य सूत्र · #2818

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति