Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

जिस समय तुम कोई ऐसा काम करने में लगे हो, जिसे तुम पूरा कर सकते हो; उस समय यदि कोई तुम्हारे मार्ग में रोड़े अटकाता है तो उससे तुम एक शब्द भी न कहो, बल्कि धीरे-धीरे उससे सम्बन्ध छोड़ दो।

When you are engaged in a task you are able to complete, if someone throws obstacles in your path, do not say even a single word to him, but gradually break off the relationship.

— आराध्य सूत्र · #2735

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति