Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

जो व्यक्ति यह सोचते हैं कि हमें उस मित्र से कितना मिलेगा, वे उस श्रेणी के लोग हैं, जिन की चोरों और बाजारू औरतों में गिनती होती है।

Those who calculate how much they will gain from a friend belong to the class counted among thieves and women of the market.

— आराध्य सूत्र · #2734

इसी विषय के और सूत्र

सभी संगति →
संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति