Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

जिस मनुष्य को तुम अपना मित्र बनाना चाहते हो, उसके कुल का उसके गुण-दोषों का, कौन-कौन लोग उसके साथी हैं और किन-किनके साथ उसका सम्बन्ध है, इन बातों का अच्छी तरह से विचार कर लो और इसके पश्चात् यदि वह योग्य है तो मित्र बना लो।

Before making someone your friend, carefully consider his lineage, his virtues and faults, who his companions are and with whom he associates; and only then, if he is worthy, make him your friend.

— आराध्य सूत्र · #2727

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति