Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

उस आदमी का हाथ देखो जिसके कपड़े हवा में उड़ गये हैं, कितनी तेजी के साथ फिर से अपने अंग को ढकने के लिए फुर्ती करता है? यही सच्चे मित्र का आदर्श है, जो विपत्ति में पड़े हुए मित्र की सहायता के लिए दौड़कर आता है।

Look at the hand of a man whose clothes have blown away in the wind—how swiftly he hurries to cover his body again! This is the ideal of a true friend, who comes running to help a friend fallen into misfortune.

— आराध्य सूत्र · #2725

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति