Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

वे ही वंदनीय हैं, वे ही पुण्यात्मा हैं और उन्हीं का इस संसार में जन्म लेना प्रशंसनीय है जो अपना काम छोड़कर अपने मित्रों का कार्य सिद्ध करते हैं।

They alone are worthy of reverence, they are the virtuous souls, and their birth in this world is praiseworthy, who set aside their own work to accomplish their friends' tasks.

— आराध्य सूत्र · #2710

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति