Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

राजा, ब्राह्मण, वैद्य, मूर्ख, मित्र, गुरु और प्रियजनों के साथ कभी विवाद नहीं करना चाहिए। लोग इहलोक-परलोक में मित्र को कभी दुःखी नहीं देखना चाहते हैं।

One should never quarrel with a king, a Brahmin, a physician, a fool, a friend, a guru, or loved ones. People never wish to see a friend unhappy, in this world or the next.

— आराध्य सूत्र · #2694

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति