Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

दीपक मिट्टी का है या सोने का यह महत्त्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वह रोशनी कितनी दे रहा है यह महत्त्वपूर्ण है, इसी तरह दोस्त अमीर है या गरीब यह महत्त्वपूर्ण नहीं बल्कि मुसीबत में वह हमारे साथ रहा या नहीं ये महत्त्वपूर्ण है।

Whether a lamp is of clay or of gold is not important; how much light it gives is. Likewise, whether a friend is rich or poor is not important; whether he stood by us in trouble is what matters.

— आराध्य सूत्र · #2692

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति