Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

सूर्य कहाँ और कमल कहाँ, मेघ कहाँ और प्रमुदित मयूर कहाँ, चन्द्रमा कहाँ और समुद्र वृद्धि कहाँ? ठीक है दूरी के कारण सत्पुरुषों की मित्रता टूटती नहीं है।

Where the sun and where the lotus, where the cloud and where the delighted peacock, where the moon and where the swelling sea? Just so, distance does not break the friendship of the good.

— आराध्य सूत्र · #2683

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति