Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

तीव्र कामी-क्रोधी-ईर्ष्यालु जीव को रोग ज्यादा घेरते हैं, एक समय सीमा के बाद उसके ज्ञान का क्षयोपशम नष्ट हो जाता है।

A person intensely lustful, angry and jealous is beset by more diseases, and beyond a certain limit even the unfolding of his knowledge is destroyed.

— आराध्य सूत्र · #1693

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा