Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

जिस कषाय भाव से वर्तमान की शान्ति भंग हो रही है उससे भविष्य में सुख कैसे मिल सकता है। 'गुस्सा' करना दूसरे की गलतियों की सजा खुद को देना है।

How can the passion that shatters the peace of the present ever bring happiness in the future? To be angry is to punish oneself for others' mistakes.

— आराध्य सूत्र · #1218

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा