वेश्या जब अपने प्रेमी का दृढ़ आलिंगन करती है, तो वह ऊपर से यह प्रदर्शन करती है कि वह उससे प्रेम करती है; परन्तु मन में तो उसे ऐसा अनुभव होता है, जैसे कोई बेगारी अन्धेरे कमरे में किसी अज्ञात लाश को छूता है।
When a courtesan tightly embraces her lover, outwardly she displays that she loves him; but in her mind she feels as a bonded labourer feels touching an unknown corpse in a dark room.
— आराध्य सूत्र · #1169
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