Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

विषयों का सेवन छोड़ने पर भी जिसके विषय वासना नहीं छूटी उसकी भव सन्तति अभी कम नहीं हुई है। विकार भाव जीव को ज्ञान शून्य बना देता है।

Even after giving up the enjoyment of sense-objects, one whose sensual craving has not left has not yet lessened the chain of rebirths. Impure feeling makes a being void of knowledge.

— आराध्य सूत्र · #1124

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य