Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

कामी पुरुष सुख-दुःख, हित-अहित, पुण्य-पाप, वध-बन्धनादि, मरण की समीपता और दुर्गति को नहीं जानता है तिल बराबर सुख के लिए सुमेरु बराबर इस लोक-परलोक में दुःख भोगता है। संयमित जीवन ही जिनशासन की प्रभावना का प्रतीक है।

A lustful man knows nothing of pleasure and pain, benefit and harm, merit and sin, killing and bondage, the nearness of death, or a wretched destiny; for a sesame-seed of pleasure he suffers a Mount-Meru of misery in this world and the next. A disciplined life alone is the emblem of the glory of the Jina's teaching.

— आराध्य सूत्र · #1106

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य