Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

बुद्धि व विवेक उसी का साथ देता है जो स्पर्शन, रसना इन दोनों काम इन्द्रियों को जीत लेता है। ब्रह्मचर्य-व्रत पालन के चार उपाय हैं– १. उसकी आवश्यकता को अच्छी तरह समझना तथा सत्संगति करना। २. इन्द्रियों को धीरे-धीरे वश में करना तथा मन में बुरे विचार न आने देना। ३. शुद्ध साथी, शुद्ध मित्र, शुद्ध पुस्तकें रखना और शुद्ध सात्त्विक आहार करना। ४. नित्य योगाभ्यास करना।

Intellect and discernment stand by the one who conquers the two sense-organs of touch and taste. There are four means to keep the vow of celibacy: 1. Understanding its necessity well and keeping good company. 2. Gradually mastering the senses and not letting evil thoughts enter the mind. 3. Keeping pure companions, pure friends, pure books, and taking pure sattvic food. 4. Practising yoga daily.

— आराध्य सूत्र · #1077

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य