चरित्र मन, वचन, काय की अशुद्धि में, विशुद्ध कार्य नहीं हो सकता है। Amid impurity of mind, speech, and body, no pure act can be done. — आराध्य सूत्र · #719 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
बुद्धि, कुलीनता, इन्द्रिय निग्रह, शास्त्र ज्ञान, पराक्रम, अधिक न बोलना, शक्ति अनुसार दान देना और कृतज्ञता–ये आठ गुण पुरुष की ख्याति बढ़ा देते हैं। चरित्र 0 – भेजें
उपदेश भले ही थोड़ा हो पर जो उच्चारण में हो वही आचरण में हो, जो मुख में हो वही मन में हो, जो दिमाग में हो वही दिल में हो, जो जिह्वा में हो वही जीवन में हो। चरित्र 0 – भेजें