Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

जैसे बकरे को सुगन्धित तेल पिलाने पर भी वह दुर्गन्ध रहित नहीं होता है, वैसे ही भ्रष्ट साधु संयमी होने पर भी विषय कषाय का त्याग नहीं करता, जैसे पशु को उत्तम भोजन मिलने पर भी वह घास ही खाता है, उसी प्रकार दीर्घ काल तक दीक्षित होकर भी भ्रष्ट साधु इन्द्रिय विषय और कषाय के परिणाम ही करता है।

Just as a goat, even fed fragrant oil, does not become free of stench, so a corrupt ascetic, though outwardly restrained, does not give up sense-pleasures and passions; just as an animal, even given fine food, still eats only grass, so a corrupt ascetic, though long initiated, still dwells on the objects of the senses and the passions.

— आराध्य सूत्र · #50

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम