Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
समय

सत्त दिणा छम्मासा, वासपुधत्तं च बारस मुहुत्ता। पल्लासंखं तिण्हं वरमवरं एग समयो दु।।

उक्त आठ अन्तर मार्गणाओं का उत्कृष्ट काल क्रम से सात दिन, छ: महिना, पृथक्त्व वर्ष, पृथक्त्व वर्ष, बारह मुहूर्त और अन्त की तीनमार्गणाओं का काल पल्य के असंख्यातवें भाग है और जघन्य काल सबका एक समय है।

The maximum interval of the above eight inquiries is respectively seven days, six months, several years, several years, twelve muhurtas, and for the last three inquiries an innumerable fraction of a palya; the minimum interval for all is one instant.

— आराध्य सूत्र · #7

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जीवन आज और अभी है, उसे कभी अतीत या भविष्य में न देखें, जिसने जीवन को अतीत या भविष्य में देखा उसने जीवन को जाना ही नहीं। हमेशा ध्यान रखें कि जो सामने है वही सच है। उसके बाद जो कुछ भी है वह सिर्फ संभावना है।
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