Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

अन्यायोपार्जितं द्रव्यं, दस वर्षाणि तिष्ठति। प्राप्तेत्वेकादशे वर्षे, समूलं च विनष्यति।।

अन्याय से उपार्जित धन दस वर्ष तक रहता और ग्यारहवें वर्ष में स्वयं का धन भी लेकर चला जाता हैं।

Wealth earned by injustice stays for ten years, and in the eleventh year it departs, carrying off even one's own wealth with it.

— आराध्य सूत्र · #27

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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