शुद्धैर्धनैर्विवर्धन्ते, सतामपि न सम्पदः। न हि स्वच्छाम्बुभिः पूर्णाः, कदाचिदपि सिन्धवः।।
ईमानदारी के धन से सज्जनों की भी सम्पत्ति नहीं बढ़ती है, जिस प्रकार स्वच्छ जल से समुद्र नहीं भरता है।
Even good men's wealth does not swell from honestly earned money, just as the ocean is never filled by clear water.
— आराध्य सूत्र · #26
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