Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

राजा अरिञ्जय ने दो चारणऋद्धि धारी मुनियों को आहारदान दिया, पञ्चाश्चर्य हुये, सोलहकारण भावना भायी, तीर्थंङ्कर प्रकृति का बन्ध किया, वे 16वें तीर्थंङ्कर शान्तिनाथजी बने।

King Arinjaya gave food to two charana munis of miraculous power; the five wonders occurred; contemplating the sixteen causes he bound the Tirthankar-nature and became the sixteenth Tirthankar, Shantinath.

— आराध्य सूत्र · #20

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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