Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

दान से अच्छा कोई धर्म नहीं- कञ्जूस सेठ धर्म कर्म से दूर रहता था, पत्नि धार्मिक थी, एक बार नगर में सन्त आये, दान पर प्रभावी प्रवचन हुआ, सेठजी भी प्रवचन सुनने गये थे, पत्नि ने पूँछा प्रवचन अच्छा लगा? सेठ ने कहा आज के प्रवचन का सार यह है कि दान से अच्छा कोई धर्म नहीं, इसलिये कल से दान माँगने का कार्य प्रारम्भ करूँगा।

No dharma is greater than charity: a miserly merchant kept away from religious deeds, though his wife was pious. Once a saint came to town and gave a moving discourse on charity, which the merchant attended. His wife asked whether he liked the sermon. He replied, 'The essence of today's sermon is that no dharma is greater than charity, so from tomorrow I shall start the work of begging for charity.'

— आराध्य सूत्र · #14

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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