Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

हजार मिथ्यादृष्टि के बराबर एक जैनी, हजार जैनी के बराबर एक सम्यग्दृष्टि, हजार सम्यग्दृष्टि के बराबर एक व्रती ब्रह्मचारी, हजार व्रती ब्रह्मचारी के बराबर एक क्षुल्लक जी, हजार क्षुल्लक जी के बराबर एक आर्यिका, हजार आर्यिका के बराबर एक मुनि, हजार मुनियों के बराबर एक ऋद्धिधारी मुनि, हजार ऋद्धिधारी मुनियों के बराबर एक तीर्थंङ्कर को आहार देने में उत्तरोत्तर ज्यादा पुण्य होता है।

Feeding one Jain equals feeding a thousand of wrong view; one right-viewed soul equals a thousand Jains; one vowed celibate equals a thousand right-viewed; one kshullak equals a thousand celibates; one aryika equals a thousand kshullaks; one muni equals a thousand aryikas; one muni of miraculous power equals a thousand munis; and one Tirthankar equals a thousand such munis, each yielding progressively greater merit.

— आराध्य सूत्र · #20

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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