नामापि यः स्मरति मोक्षपथस्य साधो, राशुक्षयं व्रजति तद्दुरितं समस्तं। यो भक्तभेषजमठादि कृतोपकारः, संसारमुत्तरति सोऽत्र नरो न चित्रं।।
जो मोक्षमार्गी साधु का नाम मात्र लेता है, उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं तब जो भोजन, औषध और आश्रय आदि देकर उपकार करता है वह मनुष्य संसार समुद्र से पार हो जाता है इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।
He who merely utters the name of a liberation-bound sadhu has all his sins destroyed; so it is no wonder that one who serves such a one with food, medicine and shelter crosses the ocean of samsara.
— आराध्य सूत्र · #6
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