Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

भुक्ति मात्र प्रदाने तु, का परीक्षा तपस्विनां। ते सन्तः सन्त्वसन्तो वा, गृही दानेन शुद्ध्यति॥

आहार मात्र देने के लिए साधु की परीक्षा नहीं करना चाहिए, वे भावलिंगी हो या न हो गृहस्थ तो दान देने से शुद्ध होता है।

For merely giving food one should not test the monk; whether or not he is a true (bhavalingi) ascetic, the householder is purified by the very act of giving.

— आराध्य सूत्र · #67

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान