Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

क्षितिगतमिववटबीजं, पात्रगतं दानमल्पमपि काले। फलतिच्छाया विभवं, बहुफलमिष्टं शरीरभृतां॥

पात्र को दिया हुआ थोड़ा भी दान, समय पाकर प्राणियों को वट वृक्ष की तरह बहुत फल देने वाला होता है।

Even a small gift given to a worthy recipient, in time, yields to beings much fruit—like a banyan seed sown in the earth—along with shade and abundance.

— आराध्य सूत्र · #65

इसी विषय के और सूत्र

सभी दान →
परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान