Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

रागद्वेषासंयम, मद दुःख भयादिकं न यद् कुरुते। द्रव्यं तदेव देयं, सुतपः स्वाध्याय वृद्धिकरं॥

साधु को वही आहार देना चाहिए जिससे राग, द्वेष, असंयम, मद, दुःख, भय आदि उत्पन्न न हो एवं स्वाध्याय और तप की वृद्धि हो।

A monk should be given only that food which produces no attachment, aversion, indiscipline, pride, sorrow or fear, and which increases self-study and austerity.

— आराध्य सूत्र · #63

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान