Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

सङ्ग्रहमुच्चस्थानं, पादोदकमर्चनं प्रणामं च। वाक्कायमनः शुद्धि, रेषण शुद्धिश्च विधिमाहुः॥

पड़गाहन करना, उच्चासन देना, पाद प्रक्षालन, पूजन, नमोस्तु, मन-वचन-काय की शुद्धि एवं आहारजल की शुद्धि ये नवधा भक्ति मानी गई है।

Welcoming, offering a high seat, washing the feet, worship, salutation (namostu), purity of mind-speech-body, and purity of the food and water—these are held to be the ninefold devotion (navadha-bhakti).

— आराध्य सूत्र · #62

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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