Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

ऐहिक फलानपेक्षा, क्षान्ति निष्कपटतानसूयत्वं। अविषादित्व मुदित्वे, निरहङ्कारित्वमिति दातृगुणाः॥

इस लोक सम्बन्धी फल की अपेक्षा से रहित, क्षमा, निष्कपटता, ईर्ष्या रहित, खेद रहित, प्रसन्नता सहित और अहङ्कार रहित होना ये आहार दाता के सात गुण हैं।

Freedom from expectation of worldly reward, forgiveness, guilelessness, freedom from envy, freedom from regret, cheerfulness, and freedom from pride—these are the seven virtues of a food-donor.

— आराध्य सूत्र · #61

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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