Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

तृष्णा दानव पीड़ित, विपद्यमानं नरं पुरो दृष्ट्वा। जलधे चपल तरङ्गैः, र्विनर्तमानो न लज्जसे कस्मात्॥

प्यास रुपी दानव से पीड़ित विपत्ति को प्राप्त मनुष्य को देखकर चञ्चल लहरों के बहाने नृत्य करते हुए हे समुद्र! तू लज्जित क्यों नहीं होता है, यहाँ पर समुद्र अन्योक्ति के माध्यम से कहा गया है, कि हे धनवान! दरिद्रता रुपी दानव से पीड़ित मनुष्य को देखकर अपने धन का अनाप-शनाप दुरुपयोग करते हुए तुझे लज्जा क्यों नहीं आती है?

O sea, dancing with restless waves at the sight of a man in distress, tormented by the demon of thirst—why are you not ashamed? By this sea-allegory it is said: O wealthy, seeing a man tormented by the demon of poverty while you recklessly squander your wealth, why do you feel no shame?

— आराध्य सूत्र · #57

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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