मा कुरु मा कुरु शोकं, रत्न समूहेन हे रोहण!। झगिति पयोधर रावो, दास्यति रत्नानि ते बहुशः॥
हे रोहण पर्वत! तेरे रत्नों को लोग ले गये हैं, तो तू शोक मत कर, शीघ्र ही बादलों की ध्वनि से तुझे बहुत सारे रत्नों की प्राप्ति हो जायगी, यहाँ रोहणगिरी अन्योक्ति के माध्यम से कहा गया है, कि हे धनवान! तू दान देकर पश्चाताप मत कर तुझे पुण्य के उदय से बाद में अनन्त गुना धन प्राप्त होगा।
O Mount Rohana! People have carried off your jewels—do not grieve; soon, at the roll of the clouds' thunder, you will gain many jewels again. By this Rohana-mountain allegory it is said: O wealthy, do not repent after giving; by the rise of merit you will later gain wealth many times over.
— आराध्य सूत्र · #56
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