Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

हंहो मलयज! मूले, सदा निषण्णान् भुजङ्गमान् वारय। येन तव सुरभिसारं, भोक्तुं शक्नोति जगदेतत्॥

हे चन्दन के वृक्ष! तू अपने समीप बैठे साँपों को दूर कर, जिससे कि ये जगत तेरी श्रेष्ठ सुगन्धी को ले सकें, यहाँ भी चन्दनपादपान्योक्ति के माध्यम से कहा गया है कि हे धनवान! तू अपने समीप बैठे साँपों के सामान इन दान में अन्तराय डालने वाले लोगों को हटा, जिससे कि तेरे धन का सदुपयोग हो सके।

O sandalwood tree! Drive away the snakes coiled about your roots, so that the world may enjoy your fine fragrance. By this sandal-tree allegory it is said: O wealthy, remove those snake-like people who obstruct your charity, so that your wealth may be well used.

— आराध्य सूत्र · #55

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान