हंहो! गुणधर जलधर, ह्यनन्य शरणं विहाय सारङ्गं। वर्षसि भूधर शिखरे, पयोधि पूरे च किं नित्यं॥
हे गुणवान् मेघ! तुम अशरण चातक पक्षी को छोड़कर पर्वत पर एवं समुद्र में क्यों बरसते हो? अर्थात् मेघान्योक्ति के द्वारा कहा गया है की हे धनवानों! जिन्हें पैसों की आवश्यकता है उन्हें छोड़कर तुम धनवानों के लिए धन क्यों लुटाते हो?
O virtuous cloud! Why do you rain upon mountain peaks and the sea, forsaking the helpless chataka bird? By this cloud-allegory it is said: O wealthy, why do you lavish your wealth on the rich, forsaking those who truly need it?
— आराध्य सूत्र · #53
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