Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

पदमायान्निधिं कुर्यात्, पादं वित्ताय खट्वयेत्। धर्मोपभोगयोः पादं, पादं भर्तव्य पोषणे॥

कमाई का पच्चीस प्रतिशत बचा कर रखना चाहिए, पच्चीस प्रतिशत व्यापार में लगाना चाहिए, पच्चीस प्रतिशत धर्म और भोगोपभोग में लगाना चाहिए, पच्चीस प्रतिशत परिवार के भरण पोषण में लगाना चाहिए।

One should save twenty-five percent of earnings, invest twenty-five percent in business, spend twenty-five percent on dharma and enjoyment, and twenty-five percent on maintaining the family.

— आराध्य सूत्र · #50

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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