Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

सोला-सोलह प्रकार का- द्रव्यशुद्धि- 1. अन्न 'सड़ा, घुना न हो', 2.जल शुद्ध हो 3. ईंधन शुद्ध हो, 4. भोजन बनाने वाला शुद्ध हो। क्षेत्र शुद्धि- 1. प्रकाश हो, 2.वायु हो, 3.दुर्गन्ध न हो, 4.चौके में शौचालय न हो। काल शुद्धि- 1.ग्रहण न हो, 2.शोक न हो, 3.रात्रि न हो, 4.जिस काल में प्रभावना हो उस काल में दान देना। भाव शुद्धि- 1.दान देने का भाव हो, 2.करुणा सहित हो, 3.वात्सल्य सहित हो, 4.विनय सहित हो।

The sixteenfold (purity): Substance-purity—(1) grain must not be rotten or worm-eaten, (2) water pure, (3) fuel pure, (4) the cook pure. Place-purity—(1) there is light, (2) air, (3) no stench, (4) no toilet in the kitchen. Time-purity—(1) no eclipse, (2) no mourning, (3) not night, (4) give at a time of prabhavana (glorification of the faith). Intention-purity—(1) the wish to give, (2) with compassion, (3) with affection, (4) with humility.

— आराध्य सूत्र · #34

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
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