Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
दान

दान वृक्ष की पत्ति तोड़ने के समान है, त्याग वृक्ष को जड़ से उखाड़ने के समान है। राग की नहीं त्याग की पूजा होती है। आहार लेते समय साधु के भी हाथ नीचे होते हैं, श्रावक का ऊँचा होता है, दानी स्वर्ग पाता, त्यागी मोक्ष पाता है।

Charity is like plucking a leaf from a tree; renunciation is like uprooting the tree. It is not attachment but renunciation that is worshipped. Even a monk's hands are lower while taking food, the layman's higher; the giver attains heaven, the renouncer attains liberation.

— आराध्य सूत्र · #4

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परोपकार में सर्वदा संलग्न रहने वाला सज्जन व्यक्ति विनाश के अवसर पर भी विनाश करने वाले से भी शत्रु भाव नहीं रखता है जैसे चन्दन का वृक्ष काटने वाले कुल्हाड़े का भी मुख सुगन्धित कर देता है।
दान