Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

इंदियकसायसण्णा, णिग्गहिदा जेहिं सुट्ठु मग्गम्हि। जावत्तावत्तेहिं य, पिहियं पावासवच्छिद्धं॥

मोक्षमार्ग में जिसने जितने अंशों में अथवा जितने समय तक इन्द्रिय, कषाय और संज्ञा को वश में किया है उसने उतने अंशों में अथवा उतने समय तक पाप आस्रव को रोका है।

On the path of liberation, to whatever degree or for however long one has subdued the senses, the passions and the instincts, to that degree and for that long one has blocked the influx of sin.

— आराध्य सूत्र · #32

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम