Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

तत्तपोऽभिमतं बाह्यं, मनो येन न दुष्यति। योगा येन न हीयन्ते येन श्रद्धा प्रवर्तते॥

वह बाह्य तप माना जाता है जिससे मन दूषित न हो, योगों में हानि न हो तथा श्रद्धा बनी रहे।

That is considered external austerity by which the mind is not defiled, the activities (yogas) are not impaired, and faith is sustained.

— आराध्य सूत्र · #30

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम