भिक्खं चर वस रण्ये, थोवं जीवय मा बभूव जंपय। दुक्खं सह जिय णिद्दा, मैत्ती भावेण सुट्ठु बैरग्गं।।
भिक्षा से भोजन करो, जङ्गल मे निवास करो, भोजन थोड़ा करो, ज्यादा मत बोलो, दुःख सहन करो, निद्रा जीतो, और प्राणी मात्र के प्रति मित्रता रखो एवं वैराग्य धारण करो।
Eat by begging, dwell in the forest, eat little, speak not much, bear hardship, conquer sleep, hold friendliness toward all beings, and embrace detachment.
— आराध्य सूत्र · #1
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