Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

उद्योतनं महनेकं, घण्टादानं जिनालये। असार्वकालिके मौनं, निर्वाहः सार्वकालिके।।

मौन का नियम पूरा हो जाने पर एक महोत्सव करना चाहिए, जिनालय में एक घण्टा दान करना चाहिए और आजीवन मौन का निर्दोष पालन करना चाहिए।

On completing a vow of silence one should hold a celebration and donate a bell to the Jina temple; and lifelong silence should be observed faultlessly.

— आराध्य सूत्र · #10

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम