सन्तोषः भाव्यते तेन, वैराग्यं तेन दर्श्यते। संयमः पोष्यते तेन, मौनं येन विधीयते।।
जिसके द्वारा मौन धारण किया जाता है, उसके द्वारा सन्तोष धारण किया जाता है, वैराग्य प्रदर्शित किया जाता है और संयम पुष्ट किया जाता है।
By whom silence is observed, by him contentment is held, detachment is shown, and self-restraint is nourished.
— आराध्य सूत्र · #5
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